अगले साल ये होंगे टॉप स्ट्रेटजिक टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स

  20वीं सदी में लोगों के जीवन में दस्तक देनेवाली टेक्नोलॉजी आज 21वीं सदी के दूसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते ऐसा अभिन्न हिस्सा बन गयी है, जिसके ...

 
20वीं सदी में लोगों के जीवन में दस्तक देनेवाली टेक्नोलॉजी आज 21वीं सदी के दूसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते ऐसा अभिन्न हिस्सा बन गयी है, जिसके बगैर मानव जीवन की कल्पना मुश्किल है. इन्वेंशन, इनोवेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बढ़ते प्रयोग की वजह से टेक्नोलॉजी ट्रेंड काफी तेज रफ्तार से विकसित हो रही है. विकसित होती टेक्नोलॉजी से आनेवाले समय में मानव जीवन निश्चित ही और भी सरल व सुगम होगा. हालांकि, इसका एक अन्य नतीजा यह होगा कि मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर उसकी निर्भरता और ज्यादा हो जायेगी.  
 
अमेरिका के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी संगठन ‘गार्टनर’ ने हाल ही में वर्ष 2016 के लिए टॉप स्ट्रैटजिक टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स की लिस्ट जारी की है. इसमें कई प्रमुख डिजिटल ट्रेंड की तरफ फोकस किया गया है. 
 
गार्टनर के अनुसार, आनेवाले समय में डिजिटल मेश से फिजिकल और वर्चुअल वर्ल्ड की दूरी खत्म होगी, वहीं डिजिटल वर्ल्ड में बने रहने के लिए हर दिन स्मार्ट मशीन की जरूरत होगी. आज के समय में अधिकांश संस्थान डिजिटल बिजनेस की राह पर हैं और तेजी से अल्गोरिथमिक बिजनेस की तरफ बढ़ रहे हैं. डिजिटल और अल्गोरिथमिक बिजनेस के लिए जरूरी है इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और उसमें बदलाव. ऐसे में ये बदलते ट्रेंड निश्चित रूप से नये वर्ष 2016 में देखने में आयेंगे. डिजिटल इंडस्ट्री में आनेवाले ये सभी बदलाव आइटी इंडस्ट्री के साथ-साथ बिजनेस और आम लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होंगे.
 
डिवाइस मैश में क्रांति 
 
आनेवाले समय में डिवाइस मैश में तेजी से विस्तार होगा. डिवाइस मैश में शामिल हैं मोबाइल डिवाइस, वियरेबल डिवाइस, कंज्यूमर एंड होम इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस, ऑटोमोटिव डिवाइस, एनवायर्नमेंटल डिवाइस समेत कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस. टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. आने वाले समय में लोग सूचना के लिए या लोगों से संपर्क साधने के लिए, सोशल कम्युनिटीज में संपर्क स्थापित करने, सरकार से संपर्क करने और व्यापार व अन्य कई कार्यों के लिए भी डिवाइस पर ही आश्रित होंगे. 
 
मोबाइल क्रांति के बाद से डिजिटल इंडस्ट्री ने मोबाइल यूजर्स को फोकस करते हुए बेहतर सेंसर्स का इस्तेमाल करके डिजिटल डिवाइस का निर्माण तेज किया है. सेंसर की वजह से डिवाइस बेहतर तरीके से काम करता है. बेहतर डिवाइस के आने से लोग इसके प्रति काफी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. ऑफिस का स्मार्ट सिस्टम हो या घरों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक या फिर कोई अन्य तकनीक, सभी डिवाइस पर ही केंद्रित हैं. 
 
फिलहाल कोई भी डिवाइस अकेले काम करता है, लेकिन आनेवाले समय में सेंसर्स के बेहतर इस्तेमाल की वजह से एक डिवाइस से कई काम हो सकते हैं. इसे कुछ इस तरीके से समझा जा सकता है कि सेंसर का इस्तेमाल बढ़ने पर किसी एक डिवाइस के जरिये ही घर के सभी डिवाइस का इस्तेमाल संभव हो पायेगा. जैसे मोबाइल से ही आप अपना फ्रीज, टीवी, कंप्यूटर, कार, बाइक व अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को संचालित कर सकेंगे.  
 
उपभोक्ताओं की पसंद समझेगा डिवाइस
 
उपभक्ताओं के अनुभव के आधार पर डिवाइस मैश किसी भी समय और जगह पर उसे उसके इंटरेस्ट की जानकारी देगा. दरअसल, यह डिवाइस और लोकेशन के बीच की नियमितता को बनाये रखने की एक प्रक्रिया है. हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी एंबिएंट यूजर एक्सपीरिएंस की राह आसान करता है. 
 
हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से डिवाइस उपभोक्ता की पसंद को समझने में सक्षम होता है. उदाहरण के तौर पर अगर ऐसा डिवाइस लेकर कोई यूजर किसी होटल की तलाश में जाता है, तो व्यक्ति के पहले होटल अवलोकन के अनुभव से डिवाइस को यह पता होता है कि यूजर किस तरह का होटल तलाश रहा है और डिवाइस उसी तरीके के होटल के बारे में जानकारी देते हुए वहां तक पहुंचाने का काम करता है. 
 
दरअसल यह डिवाइस यूजर के इमोशनल स्टेट, हैबिट्स, इंटरेस्ट, सोशल इंटरएक्शन, ग्रूप डायनामिक्स, लाइट, प्रेशर, न्वाॅइज, एटमॉस्फेयर जैसे ह्यूमन और फिजिकल इलिमेंट्स व एक्सपीरिएंस के आधार पर कार्य करता है. मौजूदा स्मार्टफोन के एप्स में इस्तेमाल होनेवाले सेंसर से अलग है यह. 
 
मशीन बनेगा इंटेलिजेंट 
 
एडवांस मशीन लर्निंग में डीप न्यूरल नेट्स (डीएनएन) क्लासिक कंप्यूटिंग और इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट के परे चल कर एक सिस्टम का निर्माण करता है, जो स्वतंत्र रूप से दुनिया का पता लगाती है. डीप न्यूरल नेट्स (डीएनएन) मशीन लर्निंग का एक एडवांस फॉर्म डाटासेट्स है, जो मशीन को इंटेलिजेंट बनाता है. डीएनएन हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर पर आधारित मशीन अपने आसपास के सभी फीचर और सभी जानकारियों को काफी तेजी से ग्रहण कर कर लेती है. एक डिवाइस के जरिये यह सभी सूचना मुहैया कराने में मदद करता है. मशीन को फास्ट बनाने के साथ कई और खूबियां इसमें मौजूद हैं. 
 
थ्रीडी प्रिंटिंग और आसान 
 
हालांकि, 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी ने 3डी प्रिंटिंग को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन एडवांस्ड 3डी प्रिटिंग टेक्नोलॉजी से विकसित धातु व मिश्रधातु, कार्बन, फाइबर, ग्लास, कंडक्टिव इंक, इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉर्मास्यूटिकल्स और बायोलॉजिकल मेटेरियल्स प्रिंट करना बेहद आसान हो जायेगा. 
 
3डी प्रिंटर में इनबिल्ट न्यू प्रैक्टिकल एप्लीकेशन कई सेक्टर के कार्यों के विस्तार में अहम भूमिका निभायेगा. इससे एयरोस्पेस, मेडिकल, ऑटोमोटिव, एनर्जी और मिलिट्री जैसे सेक्टर में कई उपकरणों का निर्माण आसान होगा. इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी समेत अन्य क्रिएटिव प्रोफेशनल कोर्स करनेवाले स्टूडेंट्स को टेस्ट करने, डिजाइन तैयार करने और अपनी स्किल्स को इंप्रूव करने में यह काफी मदद करेगा. इलेक्ट्रॉनिक व इंजन पार्ट्स, फूड आइटम बनाने के साथ-साथ बोन, स्कीन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भी यह अहम भूमिका निभायेगा. भविष्य में 3डी प्रिंटेबल मेटेरियल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा. वर्ष 2019 से इसका ग्रोइंग रेट 64.1 प्रतिशत सीजीआर होगा. 3 डायमेंशनल प्रिंटर के माध्यम से कठिन व जटिल ढांचों को आसानी से घर में भी तैयार किया जा सकता है. 
 
कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर की मदद से कोई भी वस्तु, आकृति या संरचना की 3 डायमेंशनल तसवीर बनाने और उसे 3डी प्रिंटर से प्रिंट करने पर वह आकृति उसी रूप में सामने आ जाती है. इसके अलावा 3डी कैमरा से तसवीर लेकर या सामान्य कैमरे से लिए तसवीर को 3डी स्कैनर से स्कैन करने के बाद 3डी प्रिंटर से प्रिंट देने पर यह उसी आकृति के रूप में प्रिंट होकर सामने आता है.
 
ब्रेन से कंट्रोल होगी डिवाइस
 
माइंड रीडिंग मशीन इंसान के दिमाग को समझने का काम करेगी. ऐसा मशीन जब किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगा दिया जायेगा, तो वह अपने यूजर के माइंड को पढ़ कर उसके अनुकूल कार्य करेगा. आइबीएम के अनुसार, वर्ष 2016 में यह संभव होगा कि उपभोक्ता अपने इलेक्ट्रॉनिक आइटम को अपने ब्रेन से संचालित कर सकेंगे. उन्हें किसी प्रकार से इन डिवाइस को हाथ लगाने की जरूरत नहीं होगी. इतना ही नहीं, डिवाइस में पासवर्ड लगाने की भी कोई जरूरत नहीं होगी. 
 
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अपने यूजर के माइंड में चल रही बातों को आसानी से समझ जायेगा और उसी के अनुरूप कार्य करेगा. जैसे यदि किसी उपभोक्ता को अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को कॉल करना है और उसके मन में यह विचार आता है, तो मोबाइल में माइंड रीडिंग मशीन इनबिल्ट होने की वजह से मोबाइल दिमाग में चल रहे विचार को समझ जायेगा और उपभोक्ता के दोस्त को कॉल लगा देगा. 
 
एक डिवाइस देगी सभी जानकारी
 
कुछ ऐसे डिवाइस का निर्माण हो रहा है, जिसके जरिये सभी तरह की सूचनाओं और डाटा को हासिल करना मुमकिन होगा. दरअसल डिजिटल मैश सूचनाओं को उत्पन्न करेगा, इनका इस्तेमाल करेगा और इसे भेजने का काम करेगा. 
 
इसका मतलब यह है कि आप एक ही डिवाइस से सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे यानी टेक्स्चुअल, ऑडियो और वीडियो इन्फॉर्मेशन के साथ ही सेंसरी और कॉन्टेक्स्चुअल इन्फॉर्मेशन भी प्राप्त कर सकेंगे. गार्टनर का कहना है कि वर्ष 2020 के आसपास 25 अरब ऐसे डिवाइस तैयार हो जायेंगे, जो सभी तरह की सूचनाएं देने में सक्षम होंगे. हालांकि, ऐसे डिवाइस के निर्माण से लोगों को निश्चित तौर पर फायदा होगा, लेकिन आशंका यह भी है कि ये डिवाइस लोगों के लिए परेशानियों का कारण भी बन सकते हैं. 
 
स्मार्ट मशीन खुद लेंगे फैसले
 
मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी के विकसित होने से स्मार्ट मशीन स्वतंत्र होकर कार्य करने में सक्षम हो जायेंगे. रोबोट्स, ड्रोन, सेल्फ ड्राइविंग कार, ऑटोनोमस वेहिकल्स, वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट्स (वीपीए), स्मार्ट एडवाइजर्स समेत कई अन्य ऐसे उपकरण बगैर मानवीय हस्तक्षेप या दिशानिर्देश के निर्णय लेने में सक्षम होंगे और सभी तरह की समस्याओं का समाधान कर सकेंगे. 
 
गूगल नाउ, माइक्रोसॉफ्ट कोर्टाना और एप्पल सीरी जैसे वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट्स ऑटोनोमस एजेंट के रूप में उभर कर सामने आयेंगे. अभी तक स्मार्ट मशीन को कार्य करने के लिए डायरेक्शन की जरूरत होती है, लेकिन बहुत जल्द ये मशीन खुद अपने फैसले के मुताबिक काम कर पायेंगे. अब तक रोबोट्स केवल उन्हीं निर्देशों को मानता है, जो उसके सिस्टम में इनबिल्ट किया गया हो, लेकिन आने वाले समय में यह संभव हो जायेगा कि वह इंसानों से बिल्कुल आम आदमी की तरह बातचीत करेगा और वह जो पढ़ेगा या बोलेगा उसका अर्थ भी समझेगा. 
 
रोबोट्स के अलावा अन्य स्मार्ट मशीन भी अपनी टेक्नोलॉजी की वजह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकेंगे. गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोनोमस सॉफ्टवेयर अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभायेंगे. भविष्य में वही कंपनियां आगे निकल पायेंगी, जो ऐसे सशक्त सॉफ्टवेयर बनायेंगी. फोटो साभार: फोर्ब्स डाॅट काॅम 
 
हैकिंग की राह होगी मुिश्कल 
 
डिजिटल बिजनेस और अल्गोरिथमिक इकोनॉमी की वजह से हैकर इंडस्ट्री का तेजी से विकास हुआ है. जिस स्पीड से हैकर इंडस्ट्री अपना दायरा फैला रही है, आने वाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. ऐसे में हैकर की समस्या से निपटने के लिए संस्थान ज्यादा से ज्यादा क्लाउड बेस्ड सर्विस को इस्तेमाल में लाने की प्लानिंग कर रहे हैं और कस्टमर व पार्टनर को सिस्टम से जोड़ने के लिए एपीआइ खोल रहे हैं. 
 
आइटी लीडर हैकिंग से निपटने के लिए बेहतर उपाय कर रहे हैं, वहीं एप्लीकेशन को भी ऐसे कारगर बनाया जा रहा है कि हैकर की चपेट में आने से वह खुद अपना बचाव कर सके. आने वाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री काफी तेजी से एडेप्टिव सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की तरफ अग्रसर होगी.      
 
एडवांस आर्किटेक्चर
 
डिजिटल मैश और स्मार्ट मशीन को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल इंडस्ट्री में एडवांस्ड कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर की जरूरत होगी. हाइ पावर्ड और अल्ट्रा एफिसिएंट न्यूरोमोर्फिक आर्किटेक्चर्स के जरिये एडवांस्ड सिस्टम आर्किटेक्चर विकसित किया जा सकता है. न्यूरोमोर्फिक आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एफपीजीए के साथ हाइली इफिसिएंट आर्किटेक्चर के इस्तेमाल से मिमिक न्यूरो-बायोलॉजिकल सिस्टम्स हाइ एनर्जी एफिशिएंसी के साथ एक टेराफ्लोप से ज्यादा तेज स्पीड देने में सक्षम होगी. जीपीयू और एफपीजीए (फील्ड प्रोग्रामेबल गेट अरेज) से बना यह सिस्टम इंसान के दिमाग की तरह काम करेगा. 
 
मैश एप से डिजिटल विस्तार 
 
मैश एप और सर्विस आर्किटेक्चर डायनामिक आर्किटेक्चर और यूजर एक्सपीरिएंस में वेब स्केल परफॉर्मेंस और फ्लैक्सिबिलिटी प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जो डिजिटल मैश का पूर्ण विस्तार करता है. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) प्लेटफॉर्म्स मैश एप और सर्विस आर्किटेक्चर में सहायक है. 
 
आइओटी प्लेटफॉर्म्स  के प्रबंधन, सुरक्षा और एकीकरण समेत अन्य टेक्नोलॉजी में बिल्डिंग, मैनेजिंग और सिक्योरिंग इलिमेंट्स का आधार स्थापित करने की क्षमता प्रदान करता है. आइओटी डिजिटल मैश और एंबिएंड यूजर एक्सपीरिएंस का एक महत्वपूर्ण व अति-आवश्यक पार्ट्स है, जो इसे सक्षम बनाता है. किसी कार्य या उपक्रम में आइओटी के इस्तेमाल के लिए आइओटी प्लेटफॉर्म्स  की जरूरत होगी. 
 
यह नेक्स्ट जेनरेशन इंटरनेट वर्ल्ड है. आइओटी एक ऐसा माध्यम है, जहां इंटरनेट के जरिये घर का रेफ्रिजरेटर, वाॅशिंग मशीन, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिस्टम जैसे सभी टेक्नोलॉजी व डिजिटल गैजेट्स जुड़े होते हैं और एक डिवाइस से कंट्रोल होता है. सबकुछ डिवाइस पर आधारित होता है और डिजिटल गैजेट्स को चलाने के लिए इंसानी हस्तक्षेप कम से कम होता है. 
  
20वीं सदी में लोगों के जीवन में दस्तक देनेवाली टेक्नोलॉजी आज 21वीं सदी के दूसरे दशक तक पहुंचते-पहुंचते ऐसा अभिन्न हिस्सा बन गयी है, जिसके बगैर मानव जीवन की कल्पना मुश्किल है. इन्वेंशन, इनोवेशन, क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के बढ़ते प्रयोग की वजह से टेक्नोलॉजी ट्रेंड काफी तेज रफ्तार से विकसित हो रही है. विकसित होती टेक्नोलॉजी से आनेवाले समय में मानव जीवन निश्चित ही और भी सरल व सुगम होगा. हालांकि, इसका एक अन्य नतीजा यह होगा कि मशीनों और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर उसकी निर्भरता और ज्यादा हो जायेगी.  
 
अमेरिका के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी संगठन ‘गार्टनर’ ने हाल ही में वर्ष 2016 के लिए टॉप स्ट्रैटजिक टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स की लिस्ट जारी की है. इसमें कई प्रमुख डिजिटल ट्रेंड की तरफ फोकस किया गया है. 
 
गार्टनर के अनुसार, आनेवाले समय में डिजिटल मेश से फिजिकल और वर्चुअल वर्ल्ड की दूरी खत्म होगी, वहीं डिजिटल वर्ल्ड में बने रहने के लिए हर दिन स्मार्ट मशीन की जरूरत होगी. आज के समय में अधिकांश संस्थान डिजिटल बिजनेस की राह पर हैं और तेजी से अल्गोरिथमिक बिजनेस की तरफ बढ़ रहे हैं. डिजिटल और अल्गोरिथमिक बिजनेस के लिए जरूरी है इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और उसमें बदलाव. ऐसे में ये बदलते ट्रेंड निश्चित रूप से नये वर्ष 2016 में देखने में आयेंगे. डिजिटल इंडस्ट्री में आनेवाले ये सभी बदलाव आइटी इंडस्ट्री के साथ-साथ बिजनेस और आम लोगों के लिए भी काफी उपयोगी साबित होंगे.
 
डिवाइस मैश में क्रांति 
 
आनेवाले समय में डिवाइस मैश में तेजी से विस्तार होगा. डिवाइस मैश में शामिल हैं मोबाइल डिवाइस, वियरेबल डिवाइस, कंज्यूमर एंड होम इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस, ऑटोमोटिव डिवाइस, एनवायर्नमेंटल डिवाइस समेत कई अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस. टेक्नोलॉजी के बढ़ते इस्तेमाल से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है. आने वाले समय में लोग सूचना के लिए या लोगों से संपर्क साधने के लिए, सोशल कम्युनिटीज में संपर्क स्थापित करने, सरकार से संपर्क करने और व्यापार व अन्य कई कार्यों के लिए भी डिवाइस पर ही आश्रित होंगे. 
 
मोबाइल क्रांति के बाद से डिजिटल इंडस्ट्री ने मोबाइल यूजर्स को फोकस करते हुए बेहतर सेंसर्स का इस्तेमाल करके डिजिटल डिवाइस का निर्माण तेज किया है. सेंसर की वजह से डिवाइस बेहतर तरीके से काम करता है. बेहतर डिवाइस के आने से लोग इसके प्रति काफी तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. ऑफिस का स्मार्ट सिस्टम हो या घरों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक या फिर कोई अन्य तकनीक, सभी डिवाइस पर ही केंद्रित हैं. 
 
फिलहाल कोई भी डिवाइस अकेले काम करता है, लेकिन आनेवाले समय में सेंसर्स के बेहतर इस्तेमाल की वजह से एक डिवाइस से कई काम हो सकते हैं. इसे कुछ इस तरीके से समझा जा सकता है कि सेंसर का इस्तेमाल बढ़ने पर किसी एक डिवाइस के जरिये ही घर के सभी डिवाइस का इस्तेमाल संभव हो पायेगा. जैसे मोबाइल से ही आप अपना फ्रीज, टीवी, कंप्यूटर, कार, बाइक व अन्य सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण को संचालित कर सकेंगे.  
 
उपभोक्ताओं की पसंद समझेगा डिवाइस
 
उपभक्ताओं के अनुभव के आधार पर डिवाइस मैश किसी भी समय और जगह पर उसे उसके इंटरेस्ट की जानकारी देगा. दरअसल, यह डिवाइस और लोकेशन के बीच की नियमितता को बनाये रखने की एक प्रक्रिया है. हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी एंबिएंट यूजर एक्सपीरिएंस की राह आसान करता है. 
 
हाइपर लोकेशन टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से डिवाइस उपभोक्ता की पसंद को समझने में सक्षम होता है. उदाहरण के तौर पर अगर ऐसा डिवाइस लेकर कोई यूजर किसी होटल की तलाश में जाता है, तो व्यक्ति के पहले होटल अवलोकन के अनुभव से डिवाइस को यह पता होता है कि यूजर किस तरह का होटल तलाश रहा है और डिवाइस उसी तरीके के होटल के बारे में जानकारी देते हुए वहां तक पहुंचाने का काम करता है. 
 
दरअसल यह डिवाइस यूजर के इमोशनल स्टेट, हैबिट्स, इंटरेस्ट, सोशल इंटरएक्शन, ग्रूप डायनामिक्स, लाइट, प्रेशर, न्वाॅइज, एटमॉस्फेयर जैसे ह्यूमन और फिजिकल इलिमेंट्स व एक्सपीरिएंस के आधार पर कार्य करता है. मौजूदा स्मार्टफोन के एप्स में इस्तेमाल होनेवाले सेंसर से अलग है यह. 
 
मशीन बनेगा इंटेलिजेंट 
 
एडवांस मशीन लर्निंग में डीप न्यूरल नेट्स (डीएनएन) क्लासिक कंप्यूटिंग और इन्फॉर्मेशन मैनेजमेंट के परे चल कर एक सिस्टम का निर्माण करता है, जो स्वतंत्र रूप से दुनिया का पता लगाती है. डीप न्यूरल नेट्स (डीएनएन) मशीन लर्निंग का एक एडवांस फॉर्म डाटासेट्स है, जो मशीन को इंटेलिजेंट बनाता है. डीएनएन हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर पर आधारित मशीन अपने आसपास के सभी फीचर और सभी जानकारियों को काफी तेजी से ग्रहण कर कर लेती है. एक डिवाइस के जरिये यह सभी सूचना मुहैया कराने में मदद करता है. मशीन को फास्ट बनाने के साथ कई और खूबियां इसमें मौजूद हैं. 
 
थ्रीडी प्रिंटिंग और आसान 
 
हालांकि, 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी ने 3डी प्रिंटिंग को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन एडवांस्ड 3डी प्रिटिंग टेक्नोलॉजी से विकसित धातु व मिश्रधातु, कार्बन, फाइबर, ग्लास, कंडक्टिव इंक, इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉर्मास्यूटिकल्स और बायोलॉजिकल मेटेरियल्स प्रिंट करना बेहद आसान हो जायेगा. 
 
3डी प्रिंटर में इनबिल्ट न्यू प्रैक्टिकल एप्लीकेशन कई सेक्टर के कार्यों के विस्तार में अहम भूमिका निभायेगा. इससे एयरोस्पेस, मेडिकल, ऑटोमोटिव, एनर्जी और मिलिट्री जैसे सेक्टर में कई उपकरणों का निर्माण आसान होगा. इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी समेत अन्य क्रिएटिव प्रोफेशनल कोर्स करनेवाले स्टूडेंट्स को टेस्ट करने, डिजाइन तैयार करने और अपनी स्किल्स को इंप्रूव करने में यह काफी मदद करेगा. इलेक्ट्रॉनिक व इंजन पार्ट्स, फूड आइटम बनाने के साथ-साथ बोन, स्कीन और ऑर्गन ट्रांसप्लांट में भी यह अहम भूमिका निभायेगा. भविष्य में 3डी प्रिंटेबल मेटेरियल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा. वर्ष 2019 से इसका ग्रोइंग रेट 64.1 प्रतिशत सीजीआर होगा. 3 डायमेंशनल प्रिंटर के माध्यम से कठिन व जटिल ढांचों को आसानी से घर में भी तैयार किया जा सकता है. 
 
कंप्यूटर पर सॉफ्टवेयर की मदद से कोई भी वस्तु, आकृति या संरचना की 3 डायमेंशनल तसवीर बनाने और उसे 3डी प्रिंटर से प्रिंट करने पर वह आकृति उसी रूप में सामने आ जाती है. इसके अलावा 3डी कैमरा से तसवीर लेकर या सामान्य कैमरे से लिए तसवीर को 3डी स्कैनर से स्कैन करने के बाद 3डी प्रिंटर से प्रिंट देने पर यह उसी आकृति के रूप में प्रिंट होकर सामने आता है.
 
ब्रेन से कंट्रोल होगी डिवाइस
 
माइंड रीडिंग मशीन इंसान के दिमाग को समझने का काम करेगी. ऐसा मशीन जब किसी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में लगा दिया जायेगा, तो वह अपने यूजर के माइंड को पढ़ कर उसके अनुकूल कार्य करेगा. आइबीएम के अनुसार, वर्ष 2016 में यह संभव होगा कि उपभोक्ता अपने इलेक्ट्रॉनिक आइटम को अपने ब्रेन से संचालित कर सकेंगे. उन्हें किसी प्रकार से इन डिवाइस को हाथ लगाने की जरूरत नहीं होगी. इतना ही नहीं, डिवाइस में पासवर्ड लगाने की भी कोई जरूरत नहीं होगी. 
 
इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स अपने यूजर के माइंड में चल रही बातों को आसानी से समझ जायेगा और उसी के अनुरूप कार्य करेगा. जैसे यदि किसी उपभोक्ता को अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को कॉल करना है और उसके मन में यह विचार आता है, तो मोबाइल में माइंड रीडिंग मशीन इनबिल्ट होने की वजह से मोबाइल दिमाग में चल रहे विचार को समझ जायेगा और उपभोक्ता के दोस्त को कॉल लगा देगा. 
 
एक डिवाइस देगी सभी जानकारी
 
कुछ ऐसे डिवाइस का निर्माण हो रहा है, जिसके जरिये सभी तरह की सूचनाओं और डाटा को हासिल करना मुमकिन होगा. दरअसल डिजिटल मैश सूचनाओं को उत्पन्न करेगा, इनका इस्तेमाल करेगा और इसे भेजने का काम करेगा. 
 
इसका मतलब यह है कि आप एक ही डिवाइस से सभी तरह की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे यानी टेक्स्चुअल, ऑडियो और वीडियो इन्फॉर्मेशन के साथ ही सेंसरी और कॉन्टेक्स्चुअल इन्फॉर्मेशन भी प्राप्त कर सकेंगे. गार्टनर का कहना है कि वर्ष 2020 के आसपास 25 अरब ऐसे डिवाइस तैयार हो जायेंगे, जो सभी तरह की सूचनाएं देने में सक्षम होंगे. हालांकि, ऐसे डिवाइस के निर्माण से लोगों को निश्चित तौर पर फायदा होगा, लेकिन आशंका यह भी है कि ये डिवाइस लोगों के लिए परेशानियों का कारण भी बन सकते हैं. 
 
स्मार्ट मशीन खुद लेंगे फैसले
 
मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी के विकसित होने से स्मार्ट मशीन स्वतंत्र होकर कार्य करने में सक्षम हो जायेंगे. रोबोट्स, ड्रोन, सेल्फ ड्राइविंग कार, ऑटोनोमस वेहिकल्स, वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट्स (वीपीए), स्मार्ट एडवाइजर्स समेत कई अन्य ऐसे उपकरण बगैर मानवीय हस्तक्षेप या दिशानिर्देश के निर्णय लेने में सक्षम होंगे और सभी तरह की समस्याओं का समाधान कर सकेंगे. 
 
गूगल नाउ, माइक्रोसॉफ्ट कोर्टाना और एप्पल सीरी जैसे वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट्स ऑटोनोमस एजेंट के रूप में उभर कर सामने आयेंगे. अभी तक स्मार्ट मशीन को कार्य करने के लिए डायरेक्शन की जरूरत होती है, लेकिन बहुत जल्द ये मशीन खुद अपने फैसले के मुताबिक काम कर पायेंगे. अब तक रोबोट्स केवल उन्हीं निर्देशों को मानता है, जो उसके सिस्टम में इनबिल्ट किया गया हो, लेकिन आने वाले समय में यह संभव हो जायेगा कि वह इंसानों से बिल्कुल आम आदमी की तरह बातचीत करेगा और वह जो पढ़ेगा या बोलेगा उसका अर्थ भी समझेगा. 
 
रोबोट्स के अलावा अन्य स्मार्ट मशीन भी अपनी टेक्नोलॉजी की वजह से स्वतंत्र होकर कार्य कर सकेंगे. गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोनोमस सॉफ्टवेयर अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन में बहुत बड़ी भूमिका निभायेंगे. भविष्य में वही कंपनियां आगे निकल पायेंगी, जो ऐसे सशक्त सॉफ्टवेयर बनायेंगी. फोटो साभार: फोर्ब्स डाॅट काॅम 
 
हैकिंग की राह होगी मुिश्कल 
 
डिजिटल बिजनेस और अल्गोरिथमिक इकोनॉमी की वजह से हैकर इंडस्ट्री का तेजी से विकास हुआ है. जिस स्पीड से हैकर इंडस्ट्री अपना दायरा फैला रही है, आने वाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है. ऐसे में हैकर की समस्या से निपटने के लिए संस्थान ज्यादा से ज्यादा क्लाउड बेस्ड सर्विस को इस्तेमाल में लाने की प्लानिंग कर रहे हैं और कस्टमर व पार्टनर को सिस्टम से जोड़ने के लिए एपीआइ खोल रहे हैं. 
 
आइटी लीडर हैकिंग से निपटने के लिए बेहतर उपाय कर रहे हैं, वहीं एप्लीकेशन को भी ऐसे कारगर बनाया जा रहा है कि हैकर की चपेट में आने से वह खुद अपना बचाव कर सके. आने वाले समय में डिजिटल इंडस्ट्री काफी तेजी से एडेप्टिव सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की तरफ अग्रसर होगी.      
 
एडवांस आर्किटेक्चर
 
डिजिटल मैश और स्मार्ट मशीन को सुरक्षित रखने के लिए डिजिटल इंडस्ट्री में एडवांस्ड कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर की जरूरत होगी. हाइ पावर्ड और अल्ट्रा एफिसिएंट न्यूरोमोर्फिक आर्किटेक्चर्स के जरिये एडवांस्ड सिस्टम आर्किटेक्चर विकसित किया जा सकता है. न्यूरोमोर्फिक आर्किटेक्चर टेक्नोलॉजी एफपीजीए के साथ हाइली इफिसिएंट आर्किटेक्चर के इस्तेमाल से मिमिक न्यूरो-बायोलॉजिकल सिस्टम्स हाइ एनर्जी एफिशिएंसी के साथ एक टेराफ्लोप से ज्यादा तेज स्पीड देने में सक्षम होगी. जीपीयू और एफपीजीए (फील्ड प्रोग्रामेबल गेट अरेज) से बना यह सिस्टम इंसान के दिमाग की तरह काम करेगा. 
 
मैश एप से डिजिटल विस्तार 
 
मैश एप और सर्विस आर्किटेक्चर डायनामिक आर्किटेक्चर और यूजर एक्सपीरिएंस में वेब स्केल परफॉर्मेंस और फ्लैक्सिबिलिटी प्रदान करने में सक्षम बनाता है, जो डिजिटल मैश का पूर्ण विस्तार करता है. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) प्लेटफॉर्म्स मैश एप और सर्विस आर्किटेक्चर में सहायक है. 
 
आइओटी प्लेटफॉर्म्स  के प्रबंधन, सुरक्षा और एकीकरण समेत अन्य टेक्नोलॉजी में बिल्डिंग, मैनेजिंग और सिक्योरिंग इलिमेंट्स का आधार स्थापित करने की क्षमता प्रदान करता है. आइओटी डिजिटल मैश और एंबिएंड यूजर एक्सपीरिएंस का एक महत्वपूर्ण व अति-आवश्यक पार्ट्स है, जो इसे सक्षम बनाता है. किसी कार्य या उपक्रम में आइओटी के इस्तेमाल के लिए आइओटी प्लेटफॉर्म्स  की जरूरत होगी. 
 
यह नेक्स्ट जेनरेशन इंटरनेट वर्ल्ड है. आइओटी एक ऐसा माध्यम है, जहां इंटरनेट के जरिये घर का रेफ्रिजरेटर, वाॅशिंग मशीन, टीवी, कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, स्ट्रीट लाइट, ट्रैफिक सिस्टम जैसे सभी टेक्नोलॉजी व डिजिटल गैजेट्स जुड़े होते हैं और एक डिवाइस से कंट्रोल होता है. सबकुछ डिवाइस पर आधारित होता है और डिजिटल गैजेट्स को चलाने के लिए इंसानी हस्तक्षेप कम से कम होता है. 
 

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Vigyan Pragati:  अगले साल ये होंगे टॉप स्ट्रेटजिक टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स
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